कल और आज में दो घटनाओं का खुलासा हुआ हैं। कल पता चला कि कुछ चीनी सैनिक लेह में भारतीय सीमाक्षेत्र में घुस कर चीनी भाषा में चीन लिख गए और आज पता चला है कि गुजरात के साणंद में हफ्तों से दो पाकिस्तानी झंडे लहरा रहे थे। दोपहर से सोच रहा हूं कुछ लिखूं। लेकिन सोचता हूं कि क्या लिखूं कि मेरी बात एक हिंदू या मुसलमान के तौर पर नहीं, बल्कि एक भारतीय के तौर पर सुनी जाए?
पाकिस्तान का झंडा लगाने वाली दोनों जगहें मुस्लिमों के मजहब से जुड़े स्थल हैं, एक दरगाह और दूसरा कब्रिस्तान। लेकिन मेरे बहुत से मित्र ऐसी किसी भी घटना का जवाब देने के लिए पहले से ही तैयार रहते हैं कि कुछ मुट्ठी भर मुसलमानों के लिए पूरे देश के मुसलमानों को पाकिस्तान परस्त नहीं करार दिया जा सकता। मैं भी सहमत हूं, लेकिन मेरे वे मित्र मुझे समाधान नहीं बताते। खबर यह है कि आसपास के लोगों ने करीब हफ्ते भर पहले से इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस थाने में की थी, लेकिन मोदी जी की पुलिस सोई रही। सवाल यह भी है कि उन हफ्तों में उस दरगाह के पीर या पुजारी ने इस बारे में क्या किया? उस कब्रिस्तान के केयरटेकर ने क्या किया? अगर कुछ नहीं किया, तो क्यों नहीं उन्हें इस कृत्य का दोषी माना जाना चाहिए? क्यों नहीं उस दरगाह पर बुलडोजर चलवा देना चाहिए और कब्रिस्तान को नेस्तनाबूद कर देना चाहिए?
इसका जवाब देने की हिम्मत आप तब तक नहीं जुटा सकते, जब तक आप देशद्रोह को एक खालिस देशभक्त के नज़रिए से नहीं देखेंगे। आप दरगाह और कब्रिस्तान को मंदिर और शवदाह गृह से बदल दीजिए। फिर देखिए, आपके लिए जवाब कितना आसान है। यह मसला मजहब का नहीं है, यह मसला है देशनिष्ठा का। कोई नहीं कहता कि सारे मुसलमान पाकिस्तानपरस्त हैं। लेकिन यदि दरगाह पर बुलडोजर चलवाने के बाद अमर सिंह, मुलायम, लालू या सोनिया सरीखा कोई इस पर चूं भी करता है तो ख़ुद मुसलमानों को उनके गाल पर थप्पड़ जड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए।
अगर वे ऐसा नहीं करते और बदले में मेरे सेकुलर और वामपंथी मित्रों के उस कुतर्क के साये में छिपना चाहते हैं कि हमें अपनी देशभक्ति के लिए किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं, तो फिर जरूर पूरे कौम से पाकिस्तानपरस्ती की बू आएगी। मेरे घर की छत पर अगर महीने भर तक पाकिस्तान का झंडा लहराता रहे और मुझे चैन की नींद आती रहे, तो मेरे घर पर जरूर बुलडोजर चलवा देना चाहिए और मुझे जूतों से पीटना चाहिए।
क्या फ़र्क पड़ता है कि मेरा घर कोई दरगाह है या मंदिर और मेरा नाम भुवन भास्कर है या मोहम्मद अब्दुल्ला। इस पर अगर मेरा कोई पड़ोसी यह तर्क देना चाहे कि मुझे किसी से अपनी देशनिष्ठा का प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है, तब उस पड़ोसी का घर भी सलामत नहीं बचना चाहिए।
रही बात चीन के हमारी सरहद के अंदर पहले हेलीकॉप्टर से घुसकर खाने के पैकेट गिराने और बाद में चीन लिखने की, तो इससे निपटना कोई एक दिन की बात नहीं है। यह हमें याद दिलाता है 1962 के पहले के कुछ महीनों की, जब चीन की ओर से लगातार इस तरह की भड़काउ घटनाएं होती थीं, और रोम के नीरो की तर्ज पर भारत के जवाहरलाल वंशी बजाते रहे। ग्लोबल स्टेट्समैन बनने की महत्वाकांक्षा में भारतीय जनता को धोखा देते रहे कि चीन कभी कोई ऐसी हरकत नहीं करेगा, जो भारत के लिए नुकसानदेह हो। हुआ क्या, यह इतिहास है।
चीन से लगी भारतीय सीमाओं पर घटी पिछले साल भर की घटनाओं पर नजर डालें, तो लगता है जैसे 1962 के पहले के कुछ महीनों का रिप्ले चल रहा है। भारत सरकार अगर इस पर तुरंत सतर्क न हुई और हमने अगर तुरंत रक्षात्मक उपाय नहीं किए, तो 1962 भी दूर नहीं है।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
21 टिप्पणियां:
लालू, मुलायम और सोनिया की बात तो छोड़िए, ख़ुद मोदी क्या कर रहे हैं? मुझे लगता है कि वह भी मानवाधिकार वादी हो गए हैं. या क्या पता अब आडवाणी जी के बाद नए भाजपाई धर्मनिरपेक्ष के तौर पर मोदी जी ही अवतार लेना चाह रहे हों. आपने तो देशभक्ति की बात करके मानवाधिकार का उल्लंघन कर ही दिया है.
Rightly said, perfect thoughts...
उस कब्रिस्तान के केयरटेकर ने क्या किया? अगर कुछ नहीं किया, तो क्यों नहीं उन्हें इस कृत्य का दोषी माना जाना चाहिए? क्यों नहीं उस दरगाह पर बुलडोजर चलवा देना चाहिए और कब्रिस्तान को नेस्तनाबूद कर देना चाहिए?
राम-राम, ये तो अल्पसंख्यको के प्रति भेदभाव होगा, साथ ही वोट भी तो बटोरने है !
मैं आपकी बात से पूर्ण रूप से सहमत हूं
विजयप्रकाश
हमारी सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान अवश्य खड़ा होता है ।
मोदी के बारे में कुछ ना कहेंगे. अल्पसंख्यकों के मामले में अब फूँक फूँक कर कदम उठा रहे है. राष्ट्रवादी वोट खो देंगे यह बाद में समझ आएगा.
चीन जैसा अमेरिका करता तब देखते लाल लँगूर कैसे उझलते! फिलहाल तो गाँधीस्तान अपनी जमीन गवाने को तैयार है. जय हो....
बहुत चिन्ता जनक मामला है मगर आश्चर्य मोदी जी भी? आभार इस पोस्ट के लिये
खुर्शीद और करनवी नही पधारे राय देने क्या करू मेर ये दोनो बच्चे पक्के हरामी निकले
देश का विभाजन को हम सब गलत मान रहे हैं.अब एकीकरण के प्रयास के तहत अपने सीने पर झंडा गाड़ रहे हैं
भारत ने पहल करी है एशिया बनने की अब इसे "भदेशिया " के नाम से जाना जायेगा .उधर चीन को स्लेट पकडा दिया है लिखो जो भी लिखना है .पाक साफ़ भाई को हर करवाई की छुट है .
पब्लिक सोयी हुई है . जब तक जागेगी नहीं तब तक सब कुछ ऐसे ही चलेगा न चलने तक .
सारी पार्टी चोर है .कमजोर है .
भैया जी , ये तो दूर दराज की घटना है यहीं दिल्ली में कई जगहों पर हिन्दुस्तानी झंडे लगाने और वन्दे मातरम गाने पर आपकी हत्या भी हो सकती है . अभी पिछले साल ही दिल्ली स्थित एक केन्द्रीय विद्यालय जिसका मुल्लाकरण / पकिस्तानिकरण जो भी कहिये हो चूका है ,में वन्देमातरम गाने पर एक छात्र ५ विषयों में फ़ेल कर दिया गया और कहीं चूं -चां तक नहीं हुई .
केन्द्रीय विश्वविद्यालय पढें . गलती के लिए माफ़ी चाहूँगा
लगता है अडवाणी के बाद मोदी भी "प्राइम मिनिस्टर इन वेटिंग" के चक्कर में फँस गए हैं. भैया इस तरह तो न तीन में रहोगे न तेरह में ..............
कम से कम मोदी जी से तो ये उम्मीद नहीं थी.....लेकिन शायद लगता है कि वें वाकई पी.एम.इन वेटिंग के चक्कर में फंस गये हैं!!!!
भुवन जी संतुलित शब्दों के सहारे बिलकुल सटीक विश्लेषण पेश किया है | इसमे तो कोई शक ही नहीं की मोदी जी इस मामले मैं फ़ैल हुए | पर एक बात और कहना चाहूंगा की यदि मोदी दरगाह और कब्रिस्तान के केयर टेकर पे कारवाही करना चाहे तो क्या आज की सेकुलर मीडिया, सेकुलर नेता (सोनिया मैडम, मनमोहन जी, लालू, मुलायम ...) चुप बैठ जायेंगे ? कदापि नहीं | फिर भी दिशियों के खिलाफ तो कड़ी कारवाही तो होनी ही चाहिए, भले ही इसके लिए मैडम जी या राहुल जी कितना भी चिल्लाएं | सेकुलरों ने मोदी का जीना हराम कर रखा है , लगता है मोदी थोड़े डर से गए हैं | वैसे भी हम रस्त्रवादी भी तो डरे हुए ही हैं , फिर हमारा नेता यदि डर गया तो कौन सी नयी बात हुई |
अब आते हैं चीन वाले मामले पर | भुवन जी यदि चीन भारत का कुछ और जमीं हड़प भी लेता है तो क्या क़यामत आ जायेगी ? पकिस्तान और चीन ने पहले से ही हमारी जमीं हड़प राखी है .. क्या कर लिया हमने ? अब तो हिम निर्लज्ज होकर कहते हैं भारत विश्व शक्ती बन चुका है | रोज नए नए अरबपतियों की संख्या बढ़ रही है ... लेकिन किसी को देश की अश्मिता की चिंता ही नहीं | यदि चीन के साथ युद्ध हुआ भी तो १९६२ की तरह भारतीय सरकार युद्ध का सही विश्लेषण और जानकारी भारतीय जनता से छुपा देगी और मीडिया मैं हमेशा की तरह कांग्रेस - कम्युनिस्ट - सेकुलर version of reports will be published. And after that we will discuss this or that was wrong. और भारत माता अपने को ऐसे शंतनों की माँ होने पर कोस रही होंगी ...
कोई कहे कहता रहे कितना भी हमको ............
भारत माता के वीर जवान कहीं सो गये हैं, या देशभक्ति का जज्बा कहीं खो गया है यह सब केवल अब कहने सुनने की बातें रह गई हैं, सब अपने अपने में मस्त हैं। १५ अगस्त और २६ जनवरी को कितने लोग अपने शहर के परेड ग्राऊँड पर जाकर भारत माता का सम्मान करते हैं, सब मस्ती में छुट्टी का आनंद लेते हैं। आओ चीन, पाकिस्तान कर लो कब्जा ये राजनेता तो ऐसे ही गरियाते रहेंगे, क्योंकि भारत माता के सपूत शहीद हो चुके हैं अब तो केवल भ्रष्टाचारी सपूत रह गये हैं जिन्हें कुछ नहीं दिखता है।
जय हिंद
शर्मनाक है। और, हम भी नाकारा सरकारों की वजह से खुद को लाचार पाते हैं। पाकिस्तान की हर हरकत का हल्ला तो होता है क्योंकि, इससे इस देश में वोट जो बनते हैं। चीन हमारे देश में घुसकर पत्थरों पर लहू के रंग से चीन लिख गया और हमारे विदेश मंत्री कह रहे हैं कि सीमारेखा साफ नहीं है इसलिए ऐसा हो गया तो, भई पाकिस्तान भी तो यही कह रहा है कि सीमारेखा साफ नहीं है। चीन से हमें डर लगता है और चीन इसी का फायदा उठाकर 90000 किमी के बाद कुछ और भारत को चीन बनाने की कोशिश में है।
"आसपास के लोगों ने करीब हफ्ते भर पहले से इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस थाने में की थी, लेकिन मोदी जी की पुलिस सोई रही"
पुलिस के एक भी कदम हिलाने पर जिस तरह कमीने मानवाधिक्कार वादी अपनी हरामजादा पना दिखाते है उसके बाद क्या किस मुंह से पुलिस से कुछ उम्मीद करें?
बढ़ियां पोस्ट...मैं आपकी बातसे सहमत हूं...ये घटनाएं बास्तव में चिंताजनक हैं।
आहात करती है ये खबर, ऐसा करने वाले किस मूह से रोटी खाते है इस ज़मीन पर, और वो जो हाथ पर हाथ रख बैठे है ???
ये घटनाएं चिंताजनक हैं।
बहुत चिन्ता जनक मामला है
.मैं आपकी बातसे सहमत हूं
एक टिप्पणी भेजें