गुरुवार, 21 जून 2012

क्यों जरूरी है मोदी का समर्थन


नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहिए। क्यों? क्योंकि उन्होंने 2002 के गुजरात दंगों में मुसलमानों की सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं किया। नीतीश टाइप के सेकुलरिस्ट इसके लिए अक्सर अटल बिहारी वाजपेयी के शब्दों का हवाला देते हैं कि उन्होंने राजधर्म का पालन नहीं किया। बिलकुल सही है। मैं भी ऐसा ही मानता हूं। लेकिन 1984 में कांग्रेसी दंगाइयों को सिखों की हत्या का खुलेआम संदेश देने वाले राजीव गांधी के बारे में अटल जी के क्या विचार हैं? उत्तराखंड की मांग को लेकर अपने लोकतांत्रिक मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहे निरीह और निहत्थे लोगों की हत्या और महिलाओं का बलात्कार करवाने वाले मुलायम यादव के बारे में अटल जी ने कुछ कहा था कि नहीं, पता नहीं। नंदीग्राम में गरीब जनता पर बेइंतहां जुल्म ढाने वाली कम्युनिस्टों की सरकार सेकुलर हैं। अल्पसंख्यकों (मुसलमानों) का इस देश के संसाधनों पर पहला अधिकार बताने वाले मनमोहन सिंह सेकुलर हैं। शराब के नशे में की गई शाहरूख खान की गुंडागर्दी के बाद जब उनपर कार्रवाई की गई, तो लालू यादव ने कहा कि उनको मुसलमान होने के कारण परेशान किया जा रहा है। लालू यादव सेकुलर हैं। मुसलमानी टोपी (स्कल कैप) पहनकार ख़ुद को मुल्ला घोषित करने वाले मुलायम सेकुलर हैं।

ये तमाम सेकुलरिस्ट प्रधानमंत्री बन सकते हैं, मुख्यमंत्री बन सकते हैं। मोदी नहीं बन सकते हैं। क्योंकि मोदी हिंदू साम्प्रदायिक हैं। यानी इस देश में मुस्लिम साम्प्रदायिक (जिन्हें यहां सेकुलर कहा जाता है) तो हर पद पर बैठ सकते हैं, लेकिन हिंदू साम्प्रदायिक नहीं। बस यही एक कारण है, जिसके कारण अपने को हिंदू मानने वाले हर भारतीय को मोदी के लिए खड़े हो जाना चाहिए।

नीतीश ने कम से कम मेरा भ्रम तो खत्म कर ही दिया है। मोदी एक अच्छे प्रशासक हो सकते हैं। लेकिन उन्होंने बहुत बार यह साबित किया है कि उनका अहंकार पार्टी से बड़ा हो गया है। संजय जोशी प्रकरण में उन्होंने यह भी साबित किया कि वह बड़े नेता तो हैं, लेकिन महान नेता नहीं। मैं अब तक इसी उधेड़-बुन में था कि क्या मोदी जैसे अड़ियल और अहंकारी व्यक्ति को सच में प्रधानमंत्री बनना चाहिए। लेकिन अगर इस देश के तमाम मुस्लिम साम्प्रदायिक सेकुलरिस्ट केवल इसलिए मोदी को प्रधानमंत्री नहीं बनने देना चाहते कि उनमें सत्ता के शीर्ष पर जाने के बाद भी हिंदुत्व के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करने का माद्दा है, तो फिर ये हिंदू समाज की जिद होनी चाहिए कि प्रधानमंत्री तो मोदी ही बनेंगे।

बनेंगे या नहीं बनेंगे... ये तो समय ही बताएगा। लेकिन अब मेरा 110 फीसदी मत मोदी के साथ है। और मैं फिर कहता हूं, कि हर हिंदू (दुर्घटनावश हिंदू घर में पैदा होने वालों से मुझे कुछ नहीं कहना है) को 110 फीसदी समर्थन के साथ मोदी के लिए खड़े हो जाना चाहिए।



4 टिप्‍पणियां:

Rakesh Singh - राकेश सिंह ने कहा…

अक्षरशः सहमत हूँ - हिन्दुओं की जिद होनी चाहिए की मोदी को प्रधानमंत्री बना के रहना है. दुर्भाग्यवास, ज्यादातर हिन्दू बस नाम से हिन्दू है बाकी हिन्दू विचार-संस्कार से कोई नाता-रिश्ता नहीं रखता.

जहाँ तक नितीश की बात है वो भी मोदी जैसे ही अहंकारी हैं. अहंकार के मामले में नितीश और मोदी में कोई खास फर्क नहीं.

indianrj ने कहा…

भुवनजी, आपने एकदम सच बात कही है. एक बेवकूफ, सांप्रदायिक (जो हिन्दुओं को कमतर दिखाने की कोशिश करता हो) जिद्दी की जगह एक कर्मठ जिद्दी ज्यादा बेहतर सिद्ध होगा. वैसे भी अगर मोदी एक बार सत्ता में आ जाते हैं तो जनता कोई इतनी बेबस नहीं है कि मूक दर्शक बन चुपचाप ५ वर्ष का इंतज़ार करेगी. वो मोदीजी के खिलाफ भी आवाज़ उठाएगी. लेकिन मालूम नहीं, मेरा मन कहता है एक बार, सिर्फ एक बार तो हम मोदीजी को प्रधानमंत्री बनने का अवसर दें. गुजरात जैसी चमक का आखिर हमारा भी सपना है और मोदी जैसे सशक्त और लगातार कार्य करते रहने वाले व्यक्तित्व से हमें बहुत आशाएं हैं. बल्कि कहना गलत न होगा अब उनसे ही आशाएं हैं.

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

सही अर्थ में धर्मनिरपेक्षता से अपने को कोई ऐतराज नहीं, लेकिन सिलेक्टिव धर्मनिरपेक्षता, छद्म धर्मनिरपेक्षता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए| ऐसी सोच मुझे भी पसंद है| जिद करना अच्छा नहीं लगता लेकिन अगर जिद ही चलनी है तो हमारी क्यों न चले?

lokendra singh ने कहा…

जरुरी है... मोदी का प्रधानमंत्री बनाना