गुरुवार, 22 मई 2008

तो इसीलिए सोनिया जी को पसंद हैं पाटिल

देश के गृहमंत्री शिवराज पाटिल का मानना है कि भारत में पैदा हुआ और संसद पर हमले का आरोपी अफजल गुरू तथा पाकिस्तान की जेल में फांसी की सजा पा चुका भारतीय सरबजीत दोनों एक ही जैसे हैं। अभी तक सरबजीत का परिवार और भारत सरकार उसके मामले को 'गलत पहचान का मामला' बताते हुए उसके लिए क्षमा की मांग कर रहे थे। लेकिन पाटिल का मानना है कि सरबजीत आतंकवादी है। अगर सरबजीत आतंकवादी है और फिर भी भारत सरकार उसे छुड़ाना चाहती है, तो इसका साफ मतलब है कि उसे पाकिस्तान में आतंकवाद फैलाने के लिए भारत सरकार ने भेजा है। यानी जिस तरह पाकिस्तान भारत में आतंकवाद फैला रहा है, उसी तरह भारत पाकिस्तान में आतंकवादी भेज रहा है।

और यह कहना है देश के गृहमंत्री का। वह भी ऐसे समय में जब भारत का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस समय पाकिस्तान में है और कल ही हम सबने पढ़ा कि उसने पाकिस्तान सरकार को साफ कहा है कि अगर वास्तविक शांति चाहते हो, तो आतंक रोकना पड़ेगा। पाकिस्तान ने भारत को पलट कर यह नहीं कहा कि तुम भी तो आतंक फैला रहे हो, पहले उसे रोको। तो क्या हुआ, हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हमारा गृहमंत्री है न पाकिस्तान की भाषा बोलने के लिए।

हम सभी भारतीयों को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए कि हम ऐसे मूर्ख गृहमंत्री की प्रजा हैं। वैसे यह वही गृहमंत्री हैं, जो संसदीय चुनाव में अपना क्षेत्र तक नहीं जीत सके थे। जिनके पूरे राजनीतिक कॅरियर में कोई ऐसा तमगा नहीं है, जिससे इनके एक मजबूत प्रशासक होने का सबूत मिले। लेकिन सोनिया जी को गृहमंत्री बनाने के पूरी कांग्रेस में इनसे कोई योग्य आदमी नहीं मिला। पाटिल की सबसे बड़ी योग्यता है कि उनकी रीढ़ की हड्डी नहीं है। ऐसे आदमी को बैठने और खड़े होने की तो बात छोड़िए, सोने के लिए भी दो लोगों का सहारा चाहिए। फिर इससे बढ़िया व्यक्ति कौन हो सकता था देश की आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने को। सोनिया जी का अपना पूरा परिवार, यानी बेटा, बेटी, दामाद सभी देश की सबसे इलीट सुरक्षा एजेंसी से घिरे रहते हैं। फिर देश की सुरक्षा एक रीढ़विहीन के हाथ में हुई, तो क्या बुरा है?

7 टिप्‍पणियां:

कुश एक खूबसूरत ख्याल ने कहा…

ये सब देखकर लगता है की भगवान राम का सेतु वास्तविक है और भगवान राम भी प्रमाणिक है. क्योंकि जिस तरह के मंत्री पदासिन है... ये देश राम भरोसे ही चल रहा है..

हरिमोहन सिंह ने कहा…

ये वो लोग है जो घर में मछली पालने और पानी में बकरी पालने की सलाह देते है ।

हद है धर्मनिरपेक्षता की

Sanjay Sharma ने कहा…

आ प्रधान मंत्री आपको बहुत मजबूत दिख रहा है क्या ? सब के सब गदहे हैं गदहे के लिए हम लोग चुल्लू भर पानी मे क्यों डूबें ? . बाढ़ आने दीजिये दो चार स्टेट को वैसे ही डूबना हैं प्रचंड गद्दी संभाल ही लिया है .
चमचागिरी करने-कराने मे जितना चार्म है इस देश मे वहाँ ये सब होगा ही . आत्मबल से एक भारतीय जितना जंग जीता है उतना भारतीय सरकार का हर समूह मुह की खाई है . कलह या परसों आपके ही पोस्ट पर शायद पढ़ा था की सरकार अब जनता का मुह देख रही है . समय अब करीब है परतंत्रता की . कई बार गुलाम बनने वाला ये देश .......अब आपका पोस्ट खौलाने लगा है . तब की तब देखि जायेगी .

संजय बेंगाणी ने कहा…

गाँधी परिवार को चमचे ही अनुकुल रहे है. देश किस चिड़ीया का नाम है जी.

Ghost Buster ने कहा…

सबसे गए गुजरे और लीचड़ नेताओं को सोनिया का आशीर्वाद हमेशा मिलता रहेगा. ये गोबर-गणेश उनके लिए खतरा नहीं बन सकते, यही इनकी सबसे बड़ी खूबी है. हम अभिशप्त हैं इन मूर्खों को झेलने को.

बहुत बढ़िया लिखा है.

हर्षवर्धन ने कहा…

देश का नाम ले लेकर देश बरबाद करने की कला इनसे बेहतर कोई नहीं जानता। बढ़िया जूता मारा है।

Suresh Chandra Gupta ने कहा…

"हम सभी भारतीयों को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए कि हम ऐसे मूर्ख गृहमंत्री की प्रजा हैं"

जिस जनता ने इस चमचे को हरा दिया उसे आप चुल्लू भर पानी में डूब कर मरने को कह रहे हैं. उस जनता की तो तारीफ़ की जानी चाहिए. चार साल पहले ही जनता ने उसे नंगा कर दिया था. यूपीऐ के सदस्य और उसे बाहर से समर्थन देने वाले चुल्लू भर पानी में डूब कर मरें. और मरें सोनिया जिन्होंने जनता की राय का इस तरह अपमान किया. और मरें मनमोहन जिन्होनें इस आदमी को मंत्री परिषद् में लेकर जनता की राय का अपमान किया. इस समय देश में न तो जनता की सरकार है, न ही है जनता का प्रधान मंत्री. यह मरें सब चुल्लू भर पानी में डूब कर.